August 3rd Week Word


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मेरी फ़िक्र मत करो

What is Prompt Challenge?

Weekly Prompt Challenge is an initiative by "EHSAAS" for writers to challenge their writing skills with new word every week. Every week there are 3 winners selected and monthly 12 winners. Out of 12 there will be 2 lucky winners who will stand a golden opportunity of performing in our event for free.

Ehsaas believes in giving the writers the recognition and platform they need to express themselves and reach people.


Rules for participating in the Prompt Challenge :-
1. Tag 3 of your friends in the comments once we post on our insta handle.
2. One write up only to be submitted
3. You must follow our account @ehsaasopenmic.
4. Submissions only through whatsapp group and in hindi text only along with your insta handles.
5. No plagarised content will be allowed, if found any then he/she will be disqualified.
6. Submissions will be taken only between the time limit alloted. (Eg : if you are told to submit in 24 hrs then no submissions will be accepted after 24 hrs)
7. No fake account tactics or any other activities will be tolerated to increase the number of likes.

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July Prompt Challenge Winners

1st Winner
किसीको होठो किसीको जुल्फ़ो ने मार दिया
यार मुझको तो उसकी पलको ने मार दिया

आज गलती से हाथ ऊठ गया था उसपर
लगा जैसे मैने मेरे खुदा को मार दिया|

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Aman Mishra 


2nd Winner
हर कलाम को ठुकरा दूँ इजाज़त है मुझे,
उसी काली परछाईं से मोहब्बत है मुझे,
तुम्हारे जगमगाते शहर में दम घुटता है मेरा,
उन ज़ुल्फ़ों के अंधेरों की आदत है मुझे।

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png D.S Vatsa


3rd Winner
वो ज़ुल्फ़ सवाँर रहे थे,
में उन्हें निहार रही थी।
वो अमावस की रात मे चाँद तलाश रहे थे,
और में सितारा बन उनकी राहों मे रोशनी फैला रही थी।

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Simran Rastogi
1st Winner
"नयी नवेली किसी शेर की बहर जैसी
तमाम हुस्न लिये वीरां इक शहर जैसी
अधूरी नज़्म अधूरी सी रुबाई थी वो
अपने खोये हुए मिसरे की मुन्तज़िर जैसी ||”

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Pankaj Rathod

2nd Winner
तेज़ उड़ते शहरी कबूतर आए थे देहात से
मतला निकालना इस जाहिल की बात से

रंगीन पंख हैं टूटे जिसपर माँस ताज़ा है
मुंतज़िर राहे फ़िराक़ पर बैठा हूँ रात से

तेज़ उड़ते शहरी कबूतर आए थे देहात से

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png D.S Vatsa


3rd Winner
उनकी एक आहट के मुंतज़िर बन गये, बेकाबू मन के असीर बन गये, एक ख्वाब में क्या देखा उनको, हम तो आलमगीर बन गये|

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Shrutee


4th Winner
मुन्तज़िर-सा मैं, किसान बना बैठा हूं,
बारिश-सी तुम, जो आना ही नहीं चाहती!!

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Shubhi
1st Winner
रांझे के टूटे दिल का एहसास मेरी कलम
सेहरा के तडपते आशिक़ की प्यास मेरी कलम

आ ज़रा देखे कौन जितता हैं ये जंग
तेरे हाथ मे तलवार मेरे पास मेरी कलम

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Aman Mishra


2nd Winner
मेरी जिंदगी का ऐहसास हु तुम
मेरी दुआउ का राज हु तुम
खुदा जानता है क्या हो तुम
मेरे लिए तो मेरा रुसनदान हो तुम

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png MAHAMMAD VARIS


3rd Winner
सजदा करता हूँ तुम्हे माँ
एक एहसास से तुमने मेरे जज़बात पहचान लिए,
मे बर्सो भूखा सोता रहा
तुमने एक रोटी बनाकर मेरे हालात जान लिए ।।

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Rajesh Patnaik


4th Winner
उसके दुप्पटे में अंधेरा आने से पेहले ,,
सूरज की तरह जल जाऊगा ....

खिलौना मेरा ..,

साँसों वाली गुड़िया है ,, मुझमें है धड़कती वो !
एक बहन है मेरी

एहसास -ए - सुबहा की तरह खिलती है

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Rishabh
1st Winner
वक्त-ई-अजीर है !
         वकार  नही ?
वो तेरा ईशारा है !
         जमाल नही ?
गर्दिश मे गुजार दु !
        जिदंगी पुरी ?
केसे कहु तुझे बे-वफा !
    तुझ मे कोई मलाल तो नही ?

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png MAHAMMAD VARIS


2nd Winner
सपना बड़ा था, रात छोटी रही,
मलाल ये रहा,
नींद आती रही और मैं सोती रही!!!

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Shubhi


3rd Winner
वो बारिशों के महिनो सा कुछ मेरा
मौसम - ए - हाल था,
अष्क बनकर पानि संग बेह गया जो,
वो तेरे इष्क का मलाल था।।

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Nayan Gupta


4th Winner
रूठी है मुझसे तू,
पर ये दर्द सिर्फ मुझको ही सताए।
बिन मेरे तू भी है,
पर ये मलाल सिर्फ मुझको ही खाए |

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Saraf

August Prompt Challenge Winners

1st Winner
दिल की बातें बयाँ की मैने,
बना कभी मैं कायर नहीं।
अब लिखूँ न अगर चार शब्द भी तुझपे,
तो नाम का भी मैं शायर नहीं।

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Himanshu Chiripal


2nd Winner
शायर नहीं हूं पर अब लिखने लगा हूं,
 जब से ज़माने के दर पर बिकने लगा हूं,
वैसे तो दर्द की कमी न थीं ज़माने में,
दवा सा हो गया हूं ज़माने के नज़र में
जब से शब्दों से दिलों को सिलने लगा हूं

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Gopal Jha


3rd Winner
जमीन से चाँद तक का लिखता हूँ।
फरेबी से ईमान तक का लिखता हूँ।
मेरी कलम ने भेदभाव नहीं सीखा साहेब,
शायर हूँ, अल्लाह से भगवान तक का लिखता हूँ।

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Devendra Sharma
1st Winner
गलती ये ग़ालिब  मोहब्बत कि ना थी ,
गवाहि ये फलक की भी थी,
चाँद कि चाँदनी में झलक एक तेरी ही थी ,
मिलन में दीवार महज मजहब की थी,
वरना बेवफाई  हमारी  सक़ाफ़त में ना थी..!!

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Akansha Dwivedi


2nd Winner
मिजाज बदल जाते, मगर नजाकत नहीं बदलती,
तेरे दीदारे हुस्न से मेरी शराफत नहीं बदलती,
पैग़ाम जमाने से वहीं है हुजूर दिल का,
जर्रा जो बदले बदनाम दिलों की सफ़ाक़त नहीं बदलती ।

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Nayan Gupta


3rd Winner
ज़िम्मेदारी निभाते हुवे रिश्तो को खोते देखा है,
Whatsapp की इस नई Trend में,
खत की सफ़ाक़त को खोते देखा है,
और जो तू साथ नही है मेरे,
खाली  रास्तो में खुदको खोते देखा है।

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Aliasgar


4th Winner
सदियां बदली, सफ़ाक़ते बदल गई
लोगों की रिवायतें बदल गई
हमने दो बोल प्यार से क्या बोले
आपकी तो शराफते बदल गई

http://ehsaasopenmic.com/images/social/instagram.png Saima Qureshi